कविता का नाम- मेरा देश
लेखक- पृथ्वीराज घार्गे, कक्षा- ७ वी (ड).
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मेरा देश सबसे प्यारा,
सारे जग से न्यारा
हिमगिरी जिसके सिर पे विराजे
सागर चरण पखारे.

अनेक जाती, अनेक धर्म
अनेक प्रा़ंत,अनेक वेष.
दूर-दूर तक है यही चर्चे
भारत देश किस मिट्ठी से बना???

ताजमहल एक अजुबा,
चार चा़ंद लगा देता.
दक्षिण का देव प्रा़ंत
उत्तर का स्वर्ग कश्मिर.

वाह भाई वाह !!!!
मुंबई का वडापाव तो आग्रा का पेठा,
हैदराबाद की बिर्याणी तो इ़ंदोर का पोहा.
लखनौ के कबाब तो पंजाब का पराठा.

अ़ंत मे़ं,
हम कैसे भूले बापू का सत्याग्रह,
भगतसिंग का बलिदान.
चलो, हम सब मिलकर गाहे,
मेरा भारत महान….मेरा भारत महान.
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